भारतीय स्वतंत्रता सेनानी  सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़े रहस्यों  पर आधारित हाल ही बाजार में आई एक किताब  (Conundrum : Subhash Bose’s Life After Death )के जरिये खुलासा हुआ है कि सुभाष चंद्र बोस एक गुमनाम बाबा के रूप में आजाद भारत में कई साल तक जीवित रहे।

किताब में यह दावा अमेरिका के प्रसिद्ध हैंडराइटिंग विशेषज्ञ कार्ल बेगेट द्वारा गुमनाम बाबा और सुभाष चंद्र बोस की हैंडराइटिंग के नमूनो की जांच करने के बाद किया गया है।

कार्ल बेगेट ने गुमनाम बाबा और सुभाष चंद्र बोस की हैंडराइटिंग का मिलान करने के बाद कहा है कि यह पत्र एक ही व्यक्ति द्वारा लिखे गए थे।

गौरतलब है कि इस किताब में गुमनाम बाबा द्वारा पवित्र मोहन रॉय को सन 1962 से 1985 के बीच लिखे गए 130 पत्रों का उल्लेख है ।

पवित्र मोहन रॉय इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) में सेवाएं दे चुके हैं और वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी माने जाते थे । कहा जाता है कि पवित्र मोहन रॉय गुमनाम बाबा से अक्सर मिलते रहते थे।

कार्ल बेगेट  को अमेरिका में हैंडराइटिंग जांचने का 40 साल से ज्यादा का अनुभव है और वह अब तक 5000 से ज्यादा मामले जांच चुके हैं । वह इस काम के लिए अमेरिकन ब्यूरो ऑफ डॉक्यूमेंट एग्जामिनर्स से अधिकृत हैं।

किताब में दावा किया गया है कि हो सकता है सुभाष चंद्र बोस एक मनोवैज्ञानिक बीमारी साइकोलॉजिकल ट्रॉमा ( post-traumatic stress disorder)  से पीड़ित रहे हो । इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति अक्सर काल्पनिक यादों में खो जाता है । हालांकि उस व्यक्ति के आसपास रहने वाले लोगों को इस बीमारी के लक्षणों का पता नहीं चलता ।यही कारण था कि गुमनाम बाबा की असलियत बहुत लोगों से छुपी रही क्योंकि ज्यादातर लोग  उनके प्रति आस्था रखते थे।

गौरतलब है कि गुमनाम बाबा द्वारा लिखे गए पत्र सुभाष चंद्र बोस के परिवार के सदस्यों ने कुछ समय पहले ही सार्वजनिक किए थे ।इस किताब में किए गए खुलासे के बाद अब सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़े रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है।

फैजाबाद में रहते थे गुमनाम बाबा

माना जाता है की ताइवान में वर्ष 1945 में हुए एयर क्रैश में सुभाष चंद्र बोस बच गए थे और उसके बाद वह भारत आकर उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने लगे ।लोग उनको गुमनाम बाबा के नाम से जानते थे।

इस किताब के लेखक चंद्रचूड़ घोष और अनुज धर ने 130 पत्रों के अलावा 10 हज़ार ऐसे दस्तावेजों का जिक्र भी किया है जिनको आईएनए के सदस्यों ने लिखा था । ये सदस्य भी गुमनाम बाबा से मिलते रहे थे ।इन दस्तावेजों को सूचना के अधिकार कानून के तहत हासिल किया गया था।

 

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