जनसंख्या के लिहाज से भारत विश्व में अगर दूसरे स्थान पर है तो पशुओं की संख्या के लिहाज से पहले स्थान पर है।दूध उत्पादन में भी भारत विश्व में पहले स्थान पर है।

लेकिन भारत में आवारा पशुओं की समस्या विकराल रूप ले रही है ।एक अनुमान के मुताबिक देश में एक करोड़ से ज्यादा आवारा पशु हैं जो
सड़कों और गली मोहल्लों में छुट्टे घूमते हैं।

लोग नकारा पशुओं को रात के अंधेरे में सड़कों और यहां तक की इंसानी बस्तियों में छोड़ जाते हैं पिछले कुछ अरसे से देश में आवारा पशुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है उत्तर भारत में आवारा पशुओं की संख्या सबसे अधिक है।

एक अनुमान के मुताबिक एक करोड़ से ज्यादा आवारा करोड़ से ज्यादा आवारा पशुओं में से 10 फ़ीसदी पशुओं को भी गौशाला नसीब नहीं है।

सरकारें गौ रक्षा की बात तो करती है लेकिन गौमाता आज भी सड़कों पर फिरने पर मजबूर हैं।

लेकिन आपने कभी सोचा है कि सड़कों पर ज्यादातर गाय और बैल ही क्यों दिखाई देते हैं और आवारा भैंस सड़क पर क्यों नहीं दिखाई देती !

इसका बड़ा कारण है कि देश में भैंस वध पर कोई पाबंदी नहीं है और किसान अपनी नकारा भैंसों को बेचकर उसकी को बेचकर उसकी उसकी असली कीमत का 40 फ़ीसदी तक वसूल लेते हैं। इसलिए ध्यान से सड़क पर सड़क पर आवारा नहीं घूमती।

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