भारतीय रिजर्व बैंक में कश्मीरी अलगाववादियों और आतंकवादियों के हमदर्द मौजूद हैं । अगर नहीं तो फिर साल 2013 में आरबीआई की जम्मू शाखा ने कश्मीरी आतंकवादियों द्वारा नष्ट किए गए 30 करोड रुपए के करंसी नोट किसके कहने पर बदले थे ?

कश्मीर में रह रहे पाकिस्तानी आतंकवादियों ने किस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की उसका ये ताजा उदाहरण अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।

सतीश भारद्वाज नाम के याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका में आरोप लगाया है कि रिजर्व बैंक की जम्मू शाखा ने कानून को ताक पर रखकर भारत विरोधी नारे लिखे ₹30 करोड़ के नोट चुपचाप बदल लिए थे। भारतीय करंसी पर देश विरोधी नारे लिखना ना केवल एक संगीन अपराध है बल्कि षडयंत्र भी। रिजर्व बैंक के अधिकारी चाहते तो षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की मदद कर सकते थे।

याचिकाकर्ता ने इस मामले पर सीबीआई जांच की मांग की है उधर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को जांच करने को कहा है क्योंकि मामला राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक रिजर्व बैंक की जम्मू शाखा में जमा करवाए गए 30 करोड रुपए के करंसी नोट आतंकवादियों के थे । इन करेंसी नोटों पर मई 2013 से अगस्त 2013 के बीच भारत विरोधी नारे लिखे गए थे।

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