कोर्ट ने कहा है कि शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार नहीं है

उड़ीसा हाई कोर्ट ने लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुषों के खिलाफ लगने वाले बलात्कार के आरोपों के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार नहीं है।

हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को दरकिनार कर दिया जिसमें  एक व्यक्ति की  जमानत याचिका सिर्फ इसलिए खारिज कर दी गई थी  क्योंकि अदालत ने शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाने को बलात्कार करार दिया था ।

आरोप लगाने से पहले जाने बलात्कार की परिभाषा

पुलिस ने 19 वर्षीय लड़की की शिकायत के आधार पर एक व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376  के तहत बलात्कार का मामला दर्ज किया था ।

शिकायतकर्ता ने कहा था कि आरोपी ने उसके साथ शादी करने का वादा किया था और उसकी मासूमियत का फायदा उठाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए नतीजतन वह प्रेग्नेंट हो गई।

जस्टिस एसके पाणिग्रही ने साफ किया कि शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाने को बलात्कार करार नहीं दिया जा सकता क्योंकि IPC की धारा 375 ने बलात्कार की परिभाषा की व्यख्या की है।

कब किया जा सकता है बलातकार का मामला दर्ज

जस्टिस एसके पानी ग्रही ने आईपीसी की धारा 375 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून में बलात्कार को परिभाषित किया गया है और इसमें आरोपी के खिलाफ तभी बलात्कार का मामला दर्ज किया जा सकता है जब :

  1. शारिरिक संबंध और इस जैसा कोई और कार्य जो पीड़िता की सहमति के बगैर किया गया हो
  2. पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध हो
  3. सहमति मौत या चोट पहुंचाने का डर दिखा कर सहमति हासिल की गई हो
  4. या फिर पीड़िता ने यह मानकर संबंध बनाए हो कि वह  उसका पति है मान कर अपनी सहमति दी हो
  5.  या फिर शारीरिक संबंध या बलात्कार एक ऐसी अवस्था में किया गया हो जब पीड़िता या तो नशे में हो या मानसिक रूप से अस्थिर हो या फिर उसे शारीरिक संबंध बनाने के परिणाम की जानकारी ना हो
  6. सहमति एक ऐसी पीड़िता से ली गई हो जिसकी उम्र 18 साल से कम हो
  7. पीड़िता अपनी सहमति जताने की अवस्था में न हो।

अगर इन सात परिभाषित कारणों में से कोई एक कारण हो तो आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया जा सकता है।

 

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