पाकिस्तान में धर्म और लिंग बेहद संवेदनशील विषय है ।इस कट्टरपंथी देश में महिला अधिकारों को इस्लाम के खिलाफ माना जाता है।

थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन द्वारा साल 2018 में किए गए एक सर्वे के मुताबिक पाकिस्तान को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देशों की सूची में छठे स्थान पर रखा गया है।

20 मार्च 2019 को पाकिस्तान में एक छात्र ने सिर्फ इसलिए अपने प्रोफेसर की हत्या कर दी क्योंकि वह पार्टी में महिलाओं को बुलाने की हिमाकत कर बैठे थे।

मामला भावलपुर के राजकीय सादिक अगरटर्न कॉलेज का है जहां अंग्रेजी के प्रोफेसर खालिद हमीद अपनी फेयरवेल पार्टी की तैयारी कर रहे थे और एक छात्र ने उन पर चाकू से हमला बोल दिया।

पत्रकारों ने जब आरोपी छात्र से पूछा कि उसने प्रोफेसर की हत्या क्यों की तो उसका जवाब था कि प्रोफेसर इस्लाम के खिलाफ भौंकता था । जब छात्र को यह बताया गया कि प्रोफेसर की मौत हो चुकी है तो उसका जवाब था ‘अच्छी बात है”।

पुलिस के मुताबिक इस हमले के पीछे किसी कट्टरवादी धार्मिक संगठन का हाथ नहीं है ।लेकिन आरोपी छात्र ख़ातिब हुसैन इंग्लिश के प्रोफेसर खालिद हमीद द्वारा आयोजित पार्टी के खिलाफ था।

ख़ातिब हुसैन ने जैसे ही प्रोफेसर हमीद पर चाकू से हमला बोला तो वहां पर मौजूद छात्रों ने उसे दबोच लिया ।लेकिन वह प्रोफेसर की जान नहीं बचा पाए क्योंकि घाव बहुत गहरे थे। कॉलेज के प्रिंसिपल वली मोहम्मद के मुताबिक घायल प्रोफेसर को अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई।

आपको बता दें कि भावलपुर का गवर्नमेंट सादिक अगरटर्न कॉलेज पाकिस्तान के उन कुछ चुनिंदा संस्थानों में से है जहां पर महिलाओं की संख्या ज्यादा है ।इस कॉलेज में 4000 महिला छात्र और दो हजार के करीब पुरुष छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं।

कट्टरपंथी छात्र के हमले के बाद जान गवाने वाले प्रोफेसर हमीद चार महीने बाद रिटायर होने वाले थे।

पाकिस्तान में कट्टरपंथी छात्रों द्वारा कानून को अपने हाथ में लेने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

साल 2018 में एक छात्र ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल की इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि उसने छात्र से यह पूछने की गलती कर दी थी कि वह स्कूल क्यों नहीं आया ।छात्र एक कट्टरपंथी इस्लामिक ग्रुप का सदस्य था और एक प्रदर्शन में भाग लेने के लिए स्कूल से गायब था।

मार्च 2019 में कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए न केवल महिलाओं की आलोचना की थी बल्कि उनको बलात्कार और जान से मारने की धमकी तक दे डाली ।

इन महिलाओं का कसूर सिर्फ इतना सा था कि उन्होंने यौन शोषण और तलाक को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शन किया था।

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