पंचकूला की विशेष एनआईए अदालत ने ने बुधवार को समझौता ट्रैन ब्लास्ट मामले में स्वामी असीमानंद सहित चारों आरोपियों को बरी कर दिया।

इससे पहले कोर्ट ने पाकिस्तान नागरिक राहिला वकील की याचिका खारिज कर दी ।

 

राहिला वकील ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि उसे समझौता ब्लास्ट मामले में बतौर गवाह गवाही देने की इजाजत दी जाए।

गौरतलब है कि इससे पहले एनआईए ने राहिला वकील की अर्जी का विरोध करते हुए कहा था कि राहिला वकील का डीएनए उनके कथित पिता से मैच नहीं हुआ था और न ही उनका नाम समझौता ट्रेन ब्लास्ट मामले के 13 13 गवाहों की सूची में शामिल है।

उधर राहिला के वकील मोमिन मलिक ने कहा कि उन्होंने न्यायालय के समक्ष भारतीय और पाकिस्तान उच्चायोग की लापरवाही का मामला रखा था जिसके चलते उनके मुवक्किल परेशान हो रहे हैं।

मोमिन मलिक ने कहा कि वह एनआईए की विशेष अदालत के फैसले से नाखुश है और वह पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दायर की गई एक अन्य याचिका के फैसले का इंतजार करेंगे।

गौरतलब है कि एनआईए की विशेष अदालत ने पाकिस्तान के 13 गवाहों को कई बार समन भेजे लेकिन उनमें से कोई भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ।

2007 में हुए ब्लास्ट मामले की सुनवैंपिछले 12 साल से चल रही है। जो फैसला आना था तो अचानक पाकिस्तान की राहिला वकील ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी।

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