बेल्जियम के वैज्ञानिकों ने लामा नामक जानवर के खून में कोरोना वायरस की दवाई खोजने का दवा किया है.

वैज्ञानिक इससे पहले इस ऊँट जैसे जानवर के खून से निकाली गई एंटी बॉडीज से SARS और MERS जैसी बिमारियों का इलाज कर चुके हैं. अब उम्मीद बंधी है कि लामा की एंटी बॉडीज इंसान को कोरोनावायरस से मुक्त करने में भी मददगार साबित होंगी .

बेल्जियम में अनुसंधानकर्ताओं ने हाल ही एक 4 साल के विंटर नामक लामा के शरीर से एंटीबॉडीज लेकर उस पर कोरोना वायरस संबंधित अनुसंधान शुरू किया है।

लामा और इंसान की एंटी बॉडीज में गहरी समानता

दरअसल इंसान के खून में एक सिर्फ एक ही किस्म की एंटीबॉडी मौजूद होती है जिसमें दो तरह की प्रोटीन कड़ियां मौजूद मौजूद रहती है। इनको  हल्का और भारी कह सकते हैं ।यह दोनों कड़ियां मिलकर अंग्रेजी के वाई अक्षर की आकृति बनाती हैं।

वहीं लामा के  शरीर में पाई जाने वाली एंटीबॉडीज दो तरह की होती हैं जिसमें से एक एंटीबॉडी मानव की एंटीबॉडी जैसी होती है लेकिन दूसरी एंटीबॉडी आकार में काफी छोटी होती है । यह मानवीय एंटीबॉडी से आकार में सिर्फ 25 फ़ीसदी होती है।

दिलचस्प बात यह है कि लामा के खून से निकाली गई एंटीबॉडीज भी मानव की एंटीबॉडी जैसी आकृति लेती है।

इंसान से ज्यादा शक्तिशाली है लामा की एंटी बॉडीज

लामा के शरीर में पाई जाने वाली एंटीबॉडीज की खासियत यह है कि वह बीमार इंसान के शरीर में मौजूद वायरस फैलने में मददगार प्रोटीन की भीतरी सतह तक पहुंचने में सक्षम है ।अमूमन इंसान के जिस्म में पाई जाने वाली एंटीबॉडीज इन जगहों में नहीं पहुंच पाती।

टेक्सास विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने जब विंटर नामक चार साल के लामा के शरीर में सारस और एमईआरएस नामक वायरस के जीवाणु इंजेक्ट चाहिए तो लामा के खून में मौजूद  दोनों एंटीबॉडीज ने अलग अलग दोनों वायरस के खिलाफ हमला बोला।

वैज्ञानिक लामा के शरीर की एंटीबॉडीज कोरोनावायरस मरीजों को ठीक करने में भी इस्तेमाल करना चाहते हैं ।शुरुआती अनुसंधान में इन वैज्ञानिकों को काफी सफलता मिली है ।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि लामा के रक्त में पाई जाने वाली एंटीबॉडीज लोगों को कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाएंगी।

 

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