• S- 2000 PGM बेहद सटीक बम है जो जैमर प्रूफ है
  • भारत ने पाकिस्तान पर गिराए थे इजरायली बंम
  • इन बमों के जरिए 100 किलोमीटर दूर रहकर भी टारगेट पर निशाना लगाया जा सकता है।

भारतीय वायु सेना ने अपनी बालाकोट एयर स्ट्राइक में S- 2000 PGM बमों का इस्तेमाल किया गया था जो इसराइल में बने थे। सूत्रों के मुताबिक इन बमों के जरिए भवन को पूरी तरह से उड़ाया नहीं जा सकता बल्कि सिर्फ नुकसान पहुंचाया जाता है।

S- 2000 PGM बेहद सटीक बम है जो जैमर प्रूफ है और घने बादलों के बावजूद भी इनको निशाने पर दागा जा सकता है।

बम सबसे पहले भवन के भीतर गिरता है और उसके बात देरी से फटता है। इस अत्याधुनिक बम को एक नियंत्रण कक्ष से कंट्रोल किया जाता है। गिराने से पहले छत की मोटाई और निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री का जायजा लिया जाता है। इस बम को कब फटना है यह छत की मोटाई और निर्माण में प्रयुक्त मेटेरियल पर निर्भर करता है। इन बमों के जरिए 100 किलोमीटर दूर रहकर भी टारगेट पर निशाना लगाया जा सकता है।

26 फरवरी सुबह तड़के पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय एयरफोर्स की स्ट्राइक में कुल कितने आतंकवादी मारे गए इसका तो पता नहीं लेकिन भारत सरकार के सूत्रों ने यह साफ किया है इस हमले में जैश ए मोहम्मद के ‘मदरसा तालीम उल कुरान’ परिसर के चार भवनों को तबाह किया गया था।

भारत सरकार के सूत्रों के हवाले से द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक अधिकारियों ने कहा है कि तकनीकी  और जमीनी खुफिया तंत्र की कमजोरी के चलते यह बताना संभव नहीं है कि हमले में कुल कितने आतंकवादी मारे गए और उनकी गिनती के बारे में जो भी अनुमान लगाया जा रहा है वह काल्पनिक है।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय खुफिया तंत्र के पास सिंथेटिक अपर्चर राडार (SAR)  के जरिए हासिल की गई तस्वीरें हैं जिनमें चार भवन दिखाई दे रहे हैं ।
आतंकियों द्वारा बनाए गए इन भवनों को प्रिसिजन गाइडेड मुनिशन (PGM) तकनीक की मदद से मिराज 2000 फाइटर जेट्स के जरिए गिराया गया।

पाकिस्तान ने इंकार किया था कि बालाकोट में जैश -ए- मोहम्मद के कोई आतंकवादी शिविर मौजूद थे।

लेकिन भारतीय सरकार के सूत्रों ने पाकिस्तान के दावों को गलत बताया है और कहा है कि अगर बालाकोट में जैश -ए- मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर नहीं थे तो फिर पाकिस्तान ने ध्वस्त किए गए मदरसे को सील क्यों किया और हमले के बाद पत्रकारों के घटनास्थल पर जाने पर पाबंदी क्यों लगाई गई।

सूत्रों के मुताबिक जैश ए मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर में एक गेस्ट हाउस भी बनाया गया था जिसमें मौलाना मसूद अज़हर का भाई
रहता था। ध्वस्त किए गए भवनों में एक L आकार का भवन भी शामिल था जिसमें आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने वाले लोग ठहरते थे। परिसर में एक भवन में प्रशिक्षु उग्रवादी रहते थे और चौथे भवन में हथियार चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त आतंकी ठहरते थे।

सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को जिस वक्त बालाकोट में हमला किया गया उस वक्त आसमान में बादल छाए हुए थे जिसकी वजह से हमले की जगह की साफ तस्वीरें नहीं नहीं जा सकी ।

हमले से पहले ली गई तस्वीरें अभी भी वायु सेना के पास मौजूद है जिनको सरकार चाहे तो जारी कर सकती है लेकिन यह सैटेलाइट तस्वीरों जैसी साफ नहीं होंगी।

सूत्रों के मुताबिक यह हमला सुनियोजित था और इसके निशाने पर केवल जैश -ए- मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर ही थे क्योंकि भारत आम नागरिकों को अपना निशाना नहीं बनाना चाहता था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here