पारदर्शिता का दावा करने वाली हरियाणा की भाजपा सरकार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, अशोक खेमका का तबादला करने के बाद एक बार फिर आलोचना झेल रही है।

रॉबर्ट वाड्रा जमीन घोटाले को उजागर करने वाले खेमका अपने 28 साल के कैरियर में 52 तबादले झेल चुके हैं ।उनका ताजा तबादला कुछ दिन पहले ही हुआ है। कहा जा रहा है कि अरावली की पहाड़ियों के वजूद को बचाने के चक्कर में खेमका को तबादला झेलना पड़ा।

खेमका ने किया मार्मिक ट्वीट, कहा रौंदना है तो रौंद डालो

मनोहर लाल सरकार पर अप्रत्यक्ष हमला बोलते हुए खेमका ने अपने ट्वीट में कहा है “किसके हितों की रक्षा करूँ, तुम्हारा या उनका जिनका आप प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं ? दम्भ है हमें पैरों तले रौंदोंगे, शौक से ,कई बार सहा है, एक बार और सही”।

दिलचस्प बात यह है कि पारदर्शी यानी ट्रांसपेरेंसी का दावा करने वाली भाजपा सरकार भी ईमानदार आईएएस अधिकारी को प्रताड़ित करने में पीछे नहीं रही। चाहे वह ट्रांसपोर्ट विभाग का मामला हो या फिर खेल विभाग का मामला। खेमका ने जब भी गैर कानूनी और गलत मामलों को उजागर किया उनको तबादला करके प्रताड़ित किया गया।

 

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