शरीर के तापमान में अचानक गिरावट आने की दशा को हाइपोथर्मिया कहते हैं ।हाइपोथर्मिया अक्सर ज्यादा देर तक ठंड में रहने के कारण होता है। ऐसा अक्सर सर्दियों के मौसम में ही होता है ।

हमारे शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री होता है लेकिन हाइपोथर्मिया से पीड़ित होने के बाद शरीर का तापमान गिरने लगता है। जब तापमान 95 डिग्री तक पहुंच जाए तो समझिए आपको हाइपोथर्मिया है ।हाइपोथर्मिया में शरीर का तापमान 82 डिग्री या से नीचे भी जा सकता है।

दरअसल शरीर का तापमान रेडिएशन की वजह से कम होता है। जब हम बहुत ज्यादा ठंडे तापमान या आद्रता वाली जगह पर चले जाएं  तो शरीर का तापमान कम होना शुरू हो जाता है। अक्सर ऐसा बर्फानी तूफान, बारिश या फिर ठंडे पानी में उतरने से होता है। हम सर्दियों के मौसम में ठंडे पानी में उतरें तो शरीर का तापमान हवा की तुलना में 25 फ़ीसदी ज्यादा तेजी से कम होता है।

ज्यादा ठंड में हमारे मस्तिष्क का तापमान नियंत्रण केंद्र शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है। दिमाग से इशारा मिलते ही हमारे शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। लेकिन अगर ठंड बहुत ज्यादा हो तो तापमान गिरता जाता है। हमें कंपकंपी महसूस होती है। दरअसल कंपकंपी हमारे शरीर द्वारा उत्पन्न एक ऐसा संकेत है जिसके जरिए हमारी मांसपेशियां गर्मी पैदा करती हैं ।इस अवस्था को वेस्कोकंस्ट्रिक्शन (vasoconstriction) कहते हैं जब हमारी रक्त धमनियां कुछ समय के लिए संकरी हो जाती हैं।

सामान्य तौर पर हमारे दिल और  गुर्दे (lever) की गतिविधि हमारे शरीर का तापमान नियंत्रण में रखती हैं। लेकिन जब हमारे शरीर का कोर टेंपरेचर यानी सामान्य तापमान गिरने लगता है तो दिल और गुर्दा अपनी गतिविधि कम कर देता है ताकि शरीर की ऊर्जा बचाई जा सके ।दूसरे अर्थों में शरीर का तापमान गिरने से हमारा दिल और दिमाग काम करना बंद कर देता है । हमारी सांसे थम सकती हैं और दिल की गति भी रुक सकती है।

हाइपोथर्मिया के संकेत और लक्षण

हाइपोथर्मिया से पीड़ित होने के बाद हमें कंपकंपी महसूस होती है जो एक तरह  की शारीरिक गतिविधि है जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित होता है। इसके अलावा हम धीरे-धीरे सांस लेते हैं और एक भ्रम की स्थिति में होते हैं क्योंकि हमारी याददाश्त भी कम होती जाती है । हमें थकान महसूस होने लगती है और सिर चकराने लगता है ।हमारी जुबान तक कांपने लगती है ।हाथ और पांव कांपने लगते हैं और हमारे शरीर के नाड़ी धीमे होने लगती है । बहुत ज्यादा हाइपोथर्मिया होने के बाद व्यक्ति अचेत अवस्था में भी जा सकता है। छोटे बच्चे जब हाइपोथर्मिया से पीड़ित हो तो उनकी त्वचा लाल हो जाती है और छूने से ठंडी महसूस होती है।

हाइपोथर्मिया से बचने के उपाय और उपचार

हाइपोथर्मिया से पीड़ित व्यक्ति को तुरंत चिकित्सा की जरूरत होती है क्योंकि शरीर का तापमान गिरने से दिल और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं और मरीज की जान  खतरे में होती है। अगर आपके पास तुरंत चिकित्सा सुविधा  उपलब्ध नहीं है तो आप निम्नलिखित उपाय करें :

  • सबसे पहले गीले कपड़े जैसे टोपी ,हैट, दस्ताने और जूते उतार ले ।उसके बाद हाइपोथर्मिया से पीड़ित व्यक्ति को हवा और ठंड से बचाएं ।उसे गर्म कपड़े पहने को दें और कंबल ओढा दें।कमरे का तापमान सही रखें ।
  • पीड़ित व्यक्ति को गर्म कमरे में रखें । ऐसे में शरीर का तापमान सामान्य रखने के लिए इलेक्ट्रिक ब्लैंकेट या हीटपैड भी फायदेमंद होते हैं।
  • पीड़ित व्यक्ति के धड़, गर्दन कूल्हे ,कोहनियों आदि के आसपास खास ध्यान देने की जरूरत होती है क्योंकि इन जगहों पर ठंड से त्वचा जल जाती है ।
  • बीच-बीच में पीड़ित व्यक्ति के शरीर का तापमान जांचते रहे। उसे गर्म पेय पीने को दें। लेकिन शराब और कॉफी -चाय आदि से परहेज करें क्योंकि इससे शरीर का तापमान गिरता है।
  • यदि हाइपोथर्मिया से पीड़ित व्यक्ति बेहोश है और उसके सांस लेने और नाड़ी में कोई गतिविधि नहीं है तो तुरंत आपातकालीन सेवाओं का लाभ उठाएं और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।
  • यदि मरीज को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने में देरी है तो आप तब तक मरीज को सीपीआर (CPR) मुंह से सांस देने और हल्के से छाती दबाने की कोशिश करें।

 

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