पुलवामा हमले के बाद सामने आई सुरक्षा की खामियों को सामने रखकर अब जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ, सेना और बीएसएफ के काफिले एक साथ मिलकर चलेंगे और इस दौरान आम लोगों के वाहनों को सड़क में चलने पर मनाही होगी।

सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब सेना के काफिले की मूवमेंट को दो दिनों में बांट दिया गया है। इसके अलावा सेना के अस्थाई शिविरों की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है ।

सेना की मूवमेंट के समय में भी परिवर्तन किया गया है ।देखने में आया है कि सेना के काफिले पर ज्यादातर हमले पुलवामा और पम्पोर जिलों में होते हैं जिनको दोपहर के बाद अंजाम दिया जाता है।

14 फरवरी को पुलवामा में हुए हमले के बाद सीआरपीएफ ने सेना ,बीएसएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ कई बैठकें की जिनमें काफिले की सुरक्षा पर जोर दिया गया।

सेना और पैरामिलिट्री अधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह भी तय किया गया है कि अगर किसी कारण सबका एक साथ चलना संभव न हो तो थोड़े समय के अंतराल के बाद दूसरी टुकड़ी रवाना होगी।

देखने में आया था आया है कि काज़िगण्ड और बनिहाल में सेना की टुकड़ियों पर ज्यादा हमले होते हैं। इन दो स्थानों में कई ऐसी जगह है जहां पर आसानी से हमले किए जा सकते हैं ।इसलिए इन जगहों से अब सुबह के समय ही मूवमेंट होगी ताकि आतंकवादी अंधेरे का फायदा उठा पाएं।

सुरक्षा की दृष्टि से काजीगंड में भी कड़े प्रबंध किए गए हैं ।अब इस शिविर क्षमता बढ़ाई जाएगी ताकि सेना के ज्यादा जवान ठहर सकें।

अब जवान बुलेट प्रूफ वाहनों में ही इधर से उधर जाएंगे और उनकी संख्या उपलब्ध बुलेट प्रूफ वाहनों की संख्या पर निर्भर करेगी।

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