सेरेस ग्रह पर एलियन

वैज्ञानिकों का दावा है कि रहस्य्मयी सेरेस ग्रह पर एलियन हो सकते हैं।

नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ( नासा) के वैज्ञानिकों ने सेरेस ग्रह के रहस्यों से पर्दा हटाने और इस ग्रह पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाने के लिए किये गए अनुसंधान की जानकारी साँझा की है ।

ये जानकारी बौने ग्रह सेरेस (ceres planet) की परिक्रमा करने वाले डॉन स्पेसक्राफ्ट नाम के यान द्वारा जुटाई गई तस्वीरों और अध्ययन के आधार पर सामने आई है।

सेरेस को बौना ग्रह क्यों कहते हैं 

सेरेस ग्रह आकार में काफी छोटा है इसलिए इसे बौना कहते हैं।  सेरेस आकार में भले ही बौना हो लेकिन मंगल और बृहस्पति के बीच चट्टानों की श्रृंखला में पाई जाने वाली वस्तुओं में सबसे बड़ा है।

अब नासा ने विश्व के कई अवलोकनों के बाद तैयार किये गए डेटा के आधार पर इस बौने ग्रह के बारे में नई जानकारियां जुटाई हैं।

सेरेस लगभग 600 मील चौड़ा है और पृथ्वी से सूर्य की तुलना में आकार में तीन गुना कम है। यह हमसे भले ही काफी दूर है लेकिन सूरज के काफी करीब है।

एलियन के वजूद सम्बन्धी जानकारी जुटाने में मददगार होगा नया अध्ययन 

इंसान भले ही चाँद पर बसने के सपने ले रहा हो लेकिन सौरमंडल के कई तारे और ग्रह आज भी एक रहस्य बने हुए हैं। सेरेस ग्रह को लेकर सामने आई नई जानकारियां सौर मंडल की रहस्य्मयी दुनिया को समझने में काफी हद तक मददगार होगी। खगोलीय वैज्ञानिक इसे एक नई उम्मीद कह रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि सेरेस ग्रह के बारे में जो जानकारी जुटाई गई है उसके आधार पर अब तक रहस्य बने रहे ग्रहों , एलियन लोगो के अस्तित्व और उनके जीवन के वारे में पता लगाने में मददगार साबित होगी।

नासा की एक वैज्ञानिक जूली कैस्टिलो-रोजेज़ ने कहा है कि ” सेरेस लंबे समय से एक आदिम निकाय माना जाता था लेकिन ताज़ा अध्ययन से अब साफ़ हो चुका है कि इस ग्रह का सम्बन्ध एक समुद्र की दुनिया से रहा है ”

आपको बता दें की जूली सेरेस ग्रह के अध्ययन का हिस्सा नहीं थी लेकिन उन्होंने ये विचार डॉन स्पेसक्राफ्ट द्वारा जारी तस्वीरों और दूसरी जानकारियों के बाद जारी किये हैं।

उन्होंने जताई है कि सेरेस ग्रह का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक इसके अस्तित्व में आने और उसके बाद हुई घटनाओं के बारे में अनुसंधान तेज़ करेंगे ताकि इस ग्रह की रहस्य्मयी दुनिया से पर्दा उठाया जा सके।

जानिए सेरेस के भीतर की रहस्य्मयी दुनिया के बारे में

डॉन स्पेसक्राफ्ट यान ने साल 2015 से 2018 के बीच तीन साल सेरेस ग्रह की परिक्रमा की थी। ये यान अपना ईंधन ख़त्म होने के बाद बाकि अध्ययन पूरा नहीं कर पाया।

लेकिन ईंधन ख़तम होने से पहले डॉन ने सेरेस के धरातल के ऊपर चक्कर लगाया था और ओकेटर क्रेटर (Occator crater) नामक सूखी झील नुमा सूखे गहरे गड्ढे पर अपना कैमरा फोकस किया था। आक्टर क्रेटर वही जगह है जहां वैज्ञानिकों ने एक बड़ी चमकदार चीज़ देखी थी। वह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ये चमकने वाली चीज़ है क्या।

सेरेस पर अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक अब इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि ओकेटर क्रेटर का निर्माण दो करोड़ साल पहले हुआ था।

शोध से पता चलता है कि सेरेस एक महासागर की दुनिया है, और यह हाल के दिनों में भूवैज्ञानिक रूप से सक्रिय हो सकता है। अध्यन से हैरान करने वाला एक और तथ्य सामने आया है। इसके मुताबिक सेरेस गृह पर चमकने वाली कई चीज़ों का निर्माण अलग- अलग स्त्रोतों से हुआ है ।

सेरेस की सतह पर देखी गई रहस्य्मयी चमक से भी उठा पर्दा

सेरेस पर ये विस्तृत जानकारी सात अनुसंधार पत्रों (रिसर्च पेपर्स ) के जरिये सामने आई है जो नेचर नामक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

इन रिसर्च पेपर्स ने सेरेस ग्रह के रहस्य से पर्दा हटाने का प्रयास किया है। लेकिन बहुत जानकारियां जुटाना अभी बाकी है. इनमें एलियन को लेकर लगाए जा रहे कयास प्रमुख हैं।

शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है की सेरेस की सतह पर बने गड्ढे (ओकेटर क्रेटर) में चमकने वाला हिस्सा नमक हो सकता है। माना जा रहा है कि इस ग्रह में किसी समय खारा पानी था।

शोध से यह भी पता चला है कि क्रेटर में पाए जाने वाले टीले और पहाड़ियां पानी के बहाव के बाद बने थे। इस तरह का कुदरती निर्माण केवल पृथ्वी और मंगल पर पहले देखा गया है।

एक अनुसन्धान पत्र में लिखा गया है कि ओकेटर क्रेटर गड्ढे से पैदा होने वाली चमक सूखे हुए क्लोराईड नमक से पैदा हो सकती है। ये नमक बहुत जल्दी सूख जाता है। रिसर्च से सामने आया है कि किसी समय सेरेस की जमीन पर नमकीन तरल पदार्थ मौजूद था।

नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अन्य पेपर के मुताबिक सेरेस में किसी वक्त बर्फ का ज्वालामुखी सक्रिय था। बर्फ के ज्वालामुखियों की उथल-पुथल की प्रक्रिया 90 लाख साल पहले शुरू हुई थी। लेकिन अब यह ग्रह शांत है।

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