कोरोनावायरस जैसी महामारी फैलने के बाद समूचे विश्व में मेटाबोलिज्म सुधारने के तरीके अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी की मज़बूती की बात हो रही है।

मेटाबोलिज्म हमारे शरीर की हर कोशिका में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं का योग है जो मिलकर संश्लेषण यानि synthesising के लिए ऊर्जा उपलब्ध करता है।

मेटाबोलिज्म का स्तर तय करता है कि हमारा स्वास्थ्य कैसा होगा। तकलीफ भरा होगा या आरामदायक। उम्र लम्बी होगी या छोटी। हम जवान दिखेंगे या फिर समय से पहले ही बूढ़े हो जाएंगे।

हम आपको मेटाबोलिज्म सुधारने के तरीके बता रहे हैं जिनको अपना कर आप अपना जीवन खुशियां से भर सकते हैं।

मेटाबोलिज्म सुधारने के लिए हमें अपने शरीर की ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। ऊर्जा कम खर्च होगी तो मेटाबोलिज्म घटेगा और ज्यादा खर्च होगी तो संतुलित रहेगा। इसलिए जरुरी है कि आप मेटाबोलिज्म को काबू में रखने के लिए अपनी शरीर रूपी मशीन को चलाते रहें।

ऊर्जा की एकल इकाई को कैलोरी से मापते हैं। सामान्य तौर पर पुरुष महिलाओं की तुलना में ज्यादा कैलोरी बर्न करते हैं । आपको हैरानी होगी कि जब हम सो रहे होते हैं तो भी ऊर्जा का इस्तेमाल होता है।

40 साल की उम्र के बाद मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने लगता है । ऐसे में जरुरी है कि हम मेटाबोलिज्म सुधारने के तरीके अपना कर अपना चयापचय (metabolism) तेज़ करें। लेकिन फ़िक्र मत कीजिये आप भले ही अमर नहीं हो सकते  लेकिन इस वीडियो में सुझाये गए उपायों के जरिये मेटाबॉलिज्म को संतुलित रख सकते हैं।

1.मांसपेशियों को मज़बूत कीजिये

हमारा शरीर लगातार ऊर्जा का इस्तेमाल करता है चाहे हम बिस्तर पर ही क्यों न पड़े रहें। इसे रेस्टिंग मेटाबोलिज्म कहते हैं ।

जिन लोगों के शरीर में ज्यादा मांसपेशियां होती हैं दूसरे लोगों की तुलना में उनकी रेस्टिंग मेटाबॉलिक दर ज्यादा होता है।

जीवित रहने के लिए एक पाउंड वजन की मांसपेशी को हर दिन 6 कैलोरी ऊर्जा की जरूरत होती है जबकि उतनी ही फैट बर्न करने के लिए सिर्फ दो कैलोरी की जरूरत होती है।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के एक सेशन के बाद हमारे शरीर की सभी मांसपेशियां एक्टिव हो जाती हैं और हमारी दैनिक औसत मेटाबोलिक दर बढ़ जाती है।

2. हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग वर्कआउट करें 

छोटे-मोटे व्यायाम जैसे एरोबिक्स से मांसपेशियों तो मजबूत नहीं होती लेकिन वर्कआउट के कुछ घंटों के बाद मेटाबॉलिज्म का स्तर जरूर बढ़ जाता है।

हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेंनिंग वर्कआउट को HIIT के नाम से भी जाना जाता है। HIIT में पूरी एनर्जी के साथ एक निश्चित समय में वर्क आउट किया जाता है और उसे बार-बार दोहराया जाता है । HIIT हाल के दिनों में काफी लोकप्रिय हुआ है।

हाई इंटेंसिटी व्यायाम से लो-इंटेंसिटी वर्कआउट की तुलना में हमारे शरीर की रेस्टिंग मेटाबॉलिक दर में ज्यादा वृद्धि होती है। इसलिए मेटाबॉलिज्म को मजबूत करने के लिए जिम में हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज शुरू करें।

3.पानी पीकर तेज करें मेटाबॉलिज्म

हमारे शरीर को ऊर्जा का इस्तेमाल करने के लिए पानी की जरूरत होती है ।इस प्रक्रिया को डिहाईड्रेशन कहते हैं। कम पानी पीने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है।

एक व्यस्क व्यक्ति जो दिन में 8 या उससे ज्यादा गिलास पानी पीता है वह चार गिलास पानी पीने वाले व्यक्ति की तुलना में ज्यादा कैलोरी बर्न करता है।

अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो गर्म पानी के बजाय ठंडा पानी पीएं। खाना खाने से आधा घंटा पहले पानी पी लें तो हम कम खाना खाते हैं जिससे वजन कम होता है।

इसलिए खाना या नाश्ता करने से पहले पानी का एक गिलास या कोई फीकी ड्रिंक पिएं। अगर आपको नाश्ता या सनैकिंग करनी है तो उसमें आलू के चिप्स के स्थान पर ताजा फल और सब्जियां शामिल करें क्योंकि इनमें कुदरती तौर पर पानी मौजूद होता है।

4. एनर्जी ड्रिंक्स के फायदे है लेकिन नुक्सान भी

बाजार में मिलने वाली सभी एनर्जी ड्रिंक्स स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती लेकिन इनमें मौजूद कैफीन नाम का स्टीमुलेन्ट और ट्यूरिन नाम का अमीनो एसिड मेटाबॉलिज्म को मजबूत करने में मददगार होते हैं।

क्योंकि जहां कैफीन हमारे शरीर की ऊर्जा में बढ़ोतरी करता है वही ट्यूरिन न केवल शरीर की चर्बी कम करने में मददगार है बल्कि मेटाबॉलिज्म भी बढ़ाता है।

लेकिन इन एनर्जी ड्रिंक्स का इस्तेमाल कम करना चाहिए क्योंकि ये आप का रक्तचाप और व्यग्रता यानी एंग्जाइटी बढ़ा कर नींद को प्रभावित कर सकती हैं।

5 स्नैकिंग या हल्का नाश्ता तेज़ करता है मेटाबोलिज्म

बार-बार कुछ ना कुछ खाते रहने से भी हमारा वजन कम होता है। जब आप दोपहर और रात के खाने के बीच में कुछ नहीं खाते तो आपका मेटाबॉलिज्म कमजोर पड़ता है।

ब्रेकफास्ट या लंच के तीन-चार घंटे के बीच आपको हल्का नाश्ता या फिर स्नेक्स लेने चाहिए इससे मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है और ज्यादा कैलोरी बर्न होती है।

अनुसंधान में सामने आया है कि जो लोग लंच और डिनर के बीच हल्का फुल्का नाश्ता या स्नैक्स खाते हैं न केवल ज्यादा स्वस्थ होते हैं बल्कि उनका मेटाबॉलिज्म भी मजबूत होता है।

6. मसाले और चटपटा खाना भी फायदेमंद

मसालों में कुदरती तौर पर पाए जाने वाले रसायन होते हैं जो हमारे मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं। खाने में लाल या हरी मिर्च के अलावा काली मिर्च का इस्तेमाल करके हम अपने मेटाबॉलिज्म की दर को बढ़ा सकते हैं।

हालांकि मसालेदार खाने का प्रभाव थोड़ी देर के लिए होता है लेकिन अगर हम खाने में रोज़ाना इन मसालों को शामिल करें तो फायदे बढ़ सकते हैं।

7 ज्यादा कैलोरी बर्न करती है प्रोटीन

वसा और कार्बोहाइड्रेटस वाले भोजन की तुलना में प्रोटीन वाला खाना खाएँ।

गौरतलब है कि प्रोटीन को पचाने में हमारे शरीर को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है जिससे मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है।

कम वसा वाले डेयरी उत्पाद जैसे पनीर या अंडे ,बीन्स, अखरोट, बादाम ,टोफू ,चिकन , मछली आदि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।

8. ब्लैक कॉफ़ी पीने से पहले इस ड्रिंक की खूबियां पढ़ लीजिये

ब्लैक कॉफी यानि बिना दूध की कॉफ़ी मेटाबॉलिक दर बढ़ाती है। इसके अलावा शरीर की चर्बी कम करके वजन घटाने में मदद करती है।
ब्लैक कॉफी के सेवन से भी कोलेस्ट्रोल कंट्रोल होता है। इसलिए आप दिल से संबंधी बीमारियों से दूर रहते हैं।
एक अध्ययन के मुताबिक ब्लैक कॉफी पीने से अल्जाइमर जैसी बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है। यह याद्दाश्त भी तेज करती है।

जो लोग मधुमेह यानि डायबिटीज से पीड़ित हैं, उनके लिए भी काली कॉफ़ी बहुत ही फायदेमंद है। यह शरीर में इंसुलिन बढ़ाने में मदद करती है। इसके साथ ही शुगर लेवल को भी नियंत्रित करती है।

कॉफी में कैफीन होती है जिससे थकान से राहत मिलती है और हमारे भीतर ऊर्जा का संचार होता है

9. ग्रीन -टी की चुस्कियों में छिपे हैं लम्बी उम्र के राज

ग्रीन टी में एक तरफ जहां कैफीन के दुष्प्रभाव को रोकने की क्षमता होती है वही इसमें कैटेचिन्स नामक पदार्थ भी होता है जिससे दो घंटों के लिए मेटाबॉलिज्म में बढ़ोतरी होती है।

अध्ययन से पता चलता है कि रोजाना ब्लैक कॉफी या चाय के दो से चार कप पीने से हल्के-फुल्के व्यायाम की तुलना में हमारा शरीर 17 फ़ीसदी ज्यादा कैलोरी का इस्तेमाल करता है।

10. मेटाबोलिज्म के लिए ठीक नहीं डाइटिंग

हम क्रेश डाइट से अपना वजन जरूर कम कर सकते हैं लेकिन डाइटिंग से आपके शरीर को कम पोषण मिलता है
और मांसपेशियां कमजोर होती हैं ।

अगर एक व्यस्क महिला 1200 या फिर एक वयस्क पुरुष 1800 कैलोरी से कम भोजन कर रहा है तो वह उनके मेटाबॉलिज्म को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। आपका शरीर कम कैलोरीज बर्न करता है और आपका वजन बढ़ने लगता है।

11. ज्यादा न बैठें , खड़े हो कर भी निपटाएं काम

सेडेंटरी लाइफ़स्टाइल या काफी देर तक बैठे रहना स्वास्थ्य और मेटाबॉलिज्म दोनों के लिए हानिकारक है ।

इसे अब स्मोकिंग से ज्यादा हानिकारक माना जा रहा है क्योंकि लगातार बैठे रहने से हमारा शरीर कम ऊर्जा इस्तेमाल करता है जिससे शरीर का भार बढ़ता है।

इसलिए अगर आप डेस्क जॉब करते हैं तो बीच-बीच में उठकर थोड़ा सा घूम- फिर लें। संभव हो तो कुछ काम थोड़ी देर खड़े होकर निपटा लें इससे 174 कैलोरी अतिरिक्त बर्न हो सकती है।

12 सही नींद मतलब मज़बूत मेटाबोलिज्म

स्वस्थ रहने के लिए 6 से 8 घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी। नींद की कमी मोटापा पैदा करती है जो आपके मेटाबॉलिज्म को कमजोर कर सकता है।

कम नींद लेने वाले लोगों पर मधुमेह यानी डायबिटीज का खतरा भी मंडराता है क्योंकि उनका शरीर इंसुलिन प्रतिरोधक बन जाता है।

कम नींद के कारण भूख बढ़ाने वाला घ्रेलिन नाम का हार्मोन बढ़ जाता है जो ज्यादा खाने के लिए प्रेरित करता है।

यह थे मेटाबॉलिज्म बढ़ाने वाले उपाय जिनको अपनाकर आप न केवल स्वस्थ रह सकते हैं बल्कि लंबी उम्र भी पा सकते हैं।

हेल्थ रिपोर्टर को नियमित रूप से देखते रहें क्योंकि हमें आपकी फिक्र है । आप हमारे ज्ञानवर्धक वीडियो देखकर एक तकलीफ रहित जीवन जी सकते हैं ।

आप हमेशा स्वस्थ और खुश रहें। हम इस सीरीज की अगली कड़ी में कुछ और फायदेमंद जानकारियां लेकर हाजिर होंगे।

 

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