उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती द्वारा मुख्यमंत्री रहते साल 2007 से 2012 के बीच लखनऊ और नोएडा के पार्कों में लगाई गई मूर्तियों के घोटाले का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी 2019 को मायावती से कहा कि वह मूर्तियों और स्मारकों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए के सरकारी धन को वापिस करे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बहुजन समाज पार्टी में हड़कंप मच गया ।

जिस याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी उसे रविकांत और सुकुमार नाम के दो वकीलों ने साल 2009 में दाखिल किया था।

मायावती ने लखनऊ और नोएडा में बनाए गए विभिन्न पार्कों में हाथियों की 130 मूर्तियां बनवाई थी। आरोप है कि उन्होंने कागजों पर मूर्तियों की ज्यादा कीमत दिखा कर करोड़ों रुपए के सरकारी धन का गोलमाल किया।

मायावती द्वारा इन पार्कों में लगाई गई हाथी की एक मूर्ति पर पैंसठ लाख रूपये खर्च किए गए जबकि हर मूर्ति की कीमत पांच लाख रुपये के आसपास थी।

अखिलेश यादव ने साल 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद कहा था कि मायावती द्वारा स्थापित पार्क और उसमें लगाई गई मूर्तियों के नाम पर जो घोटाला किया वह 40 हज़ार रुपये के आसपास था।

हालांकि जांच में सामने आया था कि सरकारी खजाने से इन पार्कों और स्मारकों पर सात हजार करोड़ खर्च किये गए थे।

मायावती ने पाक बनाने के लिए एक जेल काम्प्लेक्स,स्पोर्ट्स स्टेडियम और 153 रिहाइशी मकान ज़मीदोज़ करवा दिए थे।

मायावती द्वारा बनाए गए पार्क और स्मारक इसलिए विवादों में आ गए थे क्योंकि इन पार्कों में
बेतहाशा हाथियों की मूर्तियां लगाई गई थी जो बहुजन समाज पार्टी का चुनाव चिन्ह है। हाथी के अलावा मायावती ने खुद की और बसपा के संस्थापक कांशीराम की मूर्तियों पर भी बेतहाशा सरकारी पैसा बर्बाद किया।

यह घोटाला वर्ष 2012 में तब सामने आया था जब मूर्तियां बनाने वाले एक उप-ठेकेदार मदन लाल ने उत्तर प्रदेश निर्माण निगम पर  उनके पैसे का भुगतान रोकने का आरोप लगाया था।

शिकायतकर्ता मदन लाल ने कहा था कि उनको नोएडा के पार्क के लिए हाथी की कुल 60 मूर्तियां बनाने का आर्डर मिला था और उनको प्रत्येक मूर्ति बनाने के लिए 48 लाख रुपये दिए जाने थे ।लेकिन मायावती सरकार ने उनको सिर्फ साढ़े सात लाख  दिए गए जो एक धोखा था। जब उन्होंने अपना बकाया पैसा मांगने की कोशिश की तो उनको धमकियां दी गई ।


ठेकेदार मदनलाल ने आरोप लगाया था कि जब उन्होंने इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज करवाई तो मायावती ने हड़बड़ाहट और आनन-फानन में पार्क में लगी 20 मूर्तियों का ही उद्घाटन कर डाला।

जांच में सामने आया था कि पार्क में लगे पाम- ट्री की खरीद में भी घोटाला किया गया था ।ताड़ के इन वृक्षों को दुबई से सात हजार रुपये से लेकर 15 हज़ार रुपये प्रति पेड़ की दर से आयात किया गया था।

इसके अलावा जांच में यह भी पाया गया था कि मायावती द्वारा बनाये गए  दर्जन भर पार्कों में से तीन पार्कों  में लगी मूर्तियों पर सरकारी खजाने से 62 करोड़ रुपये खर्च किए थे। मायावती पर आरोप था कि उन्होंने सरकारी खजाने से निकाले गए पैसों पर खुद भी हाथ साफ किया।

दोस्तो हम इस रिपोर्ट के जरिए यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सचमुच नेताओं की मूर्तियां पार्कों में लगा कर देश का भला हो सकता है। मूर्ति चाहे मायावती की हो ,कांशीराम की ,नेहरू ,गांधी,आम्बेडकर या फिर सरदार पटेल की ।इन मूर्तियों पर बहाए गए हजारों करोड़ रुपए देश के करदाताओं और आम आदमी के साथ धोखा है।

देश को राजनेताओं की मूर्तियों और धार्मिक स्थलों की उतनी जरूरत नहीं है जितनी स्कूल और कॉलेज खोलने की जिनमें जरूरतमंद छात्रों को पढ़ने का मौका मिले।

दोस्तो आपको हमारी रिपोर्ट कैसे लगी आप इस वीडियो को लाइक, शेयर और कमेंट करके जरूर बताएं !नमस्कार !

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