आपने कभी सोचा है कि हमारी उम्र क्यों ढलती है ! सिर पर सफेदी और चेहरे पर झुर्रियां ,नज़र कमज़ोर होने और शरीर से ऊर्जा गायब होने को बुढ़ापा क्यों कहते हैं !

आखिर कैसे और क्यों आता है बुढ़ापा। क्या ढलती उम्र को रोकना संभव है। जानिए मानव शरीर के उन रहस्यों के बारे में जिसे अब विज्ञान ने खोज निकाला है। उम्र क्यों ढलती है और हम क्यों आज तक ढलती उम्र पर काबू नहीं पा सके , आपको बता रहा है ये ये वैज्ञानिक लेख !

ढलती  उम्र के लिए जिमेवार है ये जैविक कारण

आइए सबसे पहले जान लेते हैं कि ढलती उम्र आखिर है क्या। वैज्ञानिकों के मुताबिक बुढ़ापा समय के साथ आये कई बदलावों का एक संचय है जो या तो बीमारी पैदा करने के लिए जिमेवार होते हैं या फिर बढ़ती उम्र के लिए।

ढलती उम्र हमारी कोशिकाओं और ऊतकों में लगातार होने वाले बदलाव का परिणाम हैं।  हमारे शरीर की आणविक सरंचना में आए बदलाव हमें एक दिन बूढ़ा बना देते हैं जिसे अंग्रेजी में change in molecular structure कहते हैं।

मानव की ढलती उम्र शरीर में आये कई बदलावों का प्रगतिशील संचय है जो बीमारी और मृत्यु के लिए उत्तरदाई है।

बढ़ती उम्र के लिए कई महत्वपूर्ण कारण जिम्मेवार होते हैं। इन कारणों में से अगर कुछ पर काबू भी पा लिया जाए तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि एक न एक दिन सबको बूढ़ा तो होना ही है।

हम अपने जीवन को सुरक्षित जरूर कर सकते हैं लेकिन चाह कर भी अपनी उम्र नहीं बढ़ा सकते। उम्र ढलने के जो भी कारण होते हैं वह एक दूसरे से जुड़े होते हैं।

जब दो या उससे अधिक कारणों का आपसी तालमेल बढ़ जाता है तो उसके परिणाम भी नाटकीय रूप से बढ़ जाते हैं। चूँकि उम्र बढ़ने के कारणो का आपस में गहरा रिश्ता होता है इसलिए बुढ़ापे के लिए किसी एक कारण को जिमेवार मानना सही नहीं है।

लेकिन समय से पूर्व बढ़ने वाली उम्र जिसे premature ageing कहा जाता है पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में अगर  कुछ कारणों में से एक पर भी नियंत्रण पा लें तो हमारा जीवन काल काफी हद तक बढ़ भी सकता है।

ऑक्सीडेटिव तनाव और मुक्त कण भी जिमेवार हैं ढलती उम्र के लिए

हमारे शरीर में खरबों कोशिकाएं होती हैं। इन कोशिकाओं को केवल पोषण की कमी और संक्रमण का ही खतरा नहीं होता, बल्कि फ्री रेडिकल्स यानि मुक्त कण भी कोशिकाओं को काफी नुकसान पहुंचाते हैं।

जब ऑक्सीजन का एक अणु कई एकल परमाणुओं सहित एकल इलेक्ट्रॉन्स में बंट जाये तो उनको मुक्त कण कहा जाता है। ये कण कोशिकाओं में तनाव पैदा करते हैं जिसे ऑक्सीडेटिव तनाव कहा जाता है।

दरअसल मुक्त कण दूसरे अणुओं से इलेक्ट्रॉन चुराने की कोशिश करते हैं, जिससे डीएनए और दूसरे अणुओं को नुकसान होता है और फलस्वरूप खतरनाक बीमारियां जन्म लेती हैं। इसलिए मुक्त कण और ऑक्सीडेटिव तनाव उम्र बढ़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

साफ़ है की समय के साथ साथ जैसे जैसे हमारे शरीर के अंगों, कोशिकाओं और अणुओं को नुकसान पहुँचता है हम बूढ़े होते जाते हैं।

जैविक घड़ी : तय करती है हमारी उम्र की सीमा और जिन्दा रहने की अवधि 

जैविक घड़ियां यानी biological clocks एक जीव की जन्मजात घडी नुमा उपकरण हैं। वे विशिष्ट अणुओं से निर्मित होती हैं जो पूरे शरीर की कोशिकाओं के भीतर परस्पर क्रिया करती हैं । जैविक घड़ियाँ लगभग हर ऊतक और अंग में पाई जाती हैं।

शरीर की कोशिका को होने वाला किसी भी तरह का नुकसान उस कोशिका की मृत्यु का कारण बन सकता है। यदि हम पर्याप्त कोशिकाएं खो देते हैं तो हमारा अंग या उत्तक काम करना बंद कर देता है। आखिर में इंसान की मौत हो जाती है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक टेलोमेरेस के छोटा होने से भी घटती है उम्र

टेलोमेरेस हमारे गुणसूत्रों के सिरों की रक्षा करते हैं। लेकिन हर कोशिका के विभाजन के बाद इनका आकार कम होता जाता है और कोशिकाओं का विभाजन सीमित हो जाता है।

टेलोमेरेस का लगातार घटता आकार हमारे डीएनए पर बुरा असर डालता है। हमारे गुणसूत्रों के सिरे और कोशिकाएं अपनी क्षमता खोने लगते है।

छोटे टेलोमेरेस वाली कोशिकाएं कैंसर को जन्म देती हैं। टेलोमेरस के छोटा होने से उम्र बढ़ने लगती है और जीव का जीवन चक्र छोटा होता जाता है।

हालाँकि टेलोमेरेस के छोटा होने से सचमुच हमारा जीवनकाल कम हो जाता है जानने के लिए अनुसंधान जारी है।

ये थे उम्र बढ़ने के कुछ जैविक कारण। अगले वीडियोस में हम बात करेंगे ढलती उम्र को थामने के लिए हो रहे वैज्ञानकि प्रयासों के बारे में।

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