भारतीय राजनीति और समाज में गाय को बहुत ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। यहां तक कि गाय को माता का दर्जा दिया गया है। वहीं गाय के पुलिंग सांड की कोई पूछ ही नहीं है।

गली मोहल्लों ,बाजारों, चौराहों और यहां तक कि सड़कों पर आवारा फिरते सांडों की अपनी अलग दुनिया है। जब सांड मस्ती में होता है तो उसे ना लोगों की फिक्र होती है और ना ही सड़कों से गुजरने वाली गाड़ियों की ।जहां इनका मन करे वहीं से अपना मल्लयुद्ध शुरू कर देते हैं अंजाम कुछ भी हो।

सड़क पर लड़ते सांड कई बार ट्रैफिक जाम करते हैं तो कई बार लड़ते लड़ते इंसानों को भी अपनी चपेट में लेते हैं। और यहां तक कि लड़ते-लड़ते घरों और दुकानों में भी घुस जाते हैं।

एक तरफ लोग गायों की खूब देखभाल करते हैं वही सांड हिंदू समाज की उपेक्षा का शिकार है। इनको कोई पूछने वाला नहीं ।

सांड क्या खाते हैं ,कहां रहते हैं किसी को सरोकार नहीं । ज्यादातर गौशालाओं में सिर्फ गाय और बछड़े ही रहते हैं ।सांडों के लिए वहां पर कोई जगह नहीं है ।वह जगह -जगह से दुत्कारे जाते हैं और जब ना माने तो उन पर पानी फेंका जाता है।

हिंदू समाज की उपेक्षा का शिकार यह सांड अब गुस्सैल हो चले हैं ।अक्सर दुत्कारे जाने से नाराज सांड लोगों पर हमला भी बोल देते हैं।

दोपहिया वाहनों को अपना स्त्रीलिंग समझने लगते हैं सांड, कई बार करते हैं भैंस का बलात्कार

इस वीडियो में हमने जितने सांडों को दिखाया है इसमें दो क्लिप ऐसे हैं जिसमें सांड स्कूटी या बाइक को गाय समझकर उल्टी-सीधी हरकतें भी कर देते हैं।

आवारा सांड अब लोगों के लिए समस्या अभी बन रहे हैं। हरियाणा में सांड अक्सर भैंसों के साथ संसर्ग करके किसानों के लिए एक बड़ी समस्या पैदा करते हैं।आवारा सांड (बैल) द्वारा भैंस का बलात्कार आम है जिससे उनके बछड़े पैदा नही होते।

 

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