पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पति पत्नी के बीच चल रहे शादी से जुड़े एक विवाद को लेकर अहम फैसला सुनाया है ।

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि सुहागरात के दिन पति या पत्नी द्वारा एक दूसरे से शारीरिक संबंध  न बनाना  एक तरह की क्रूरता है यानी अत्याचार है।

अक्सर सुनने में आता है कि क नपुंसक मर्द सुहागरात के दिन या फिर उसके बाद पत्नी से शारीरिक संबंध नहीं बना पाते जिस कारण उनके बीच में तलाक हो जाता है|  या फिर पत्नी- पति को सम्बन्ध नहीं बनाने देती | लेकिन हरियाणा के इस मामले में पत्नी नहीं पत्नी पति को संबंध नहीं बनाने दिए और दोनों के बीच में विवाद हो गया।

सुहागरात के मौके पर ही कह दिया था किसी और से शादी करना चाहती थी

यह मामला हरियाणा के रेवाड़ी जिला से जुड़ा हुआ है जिसमें पत्नी ने सुहागरात को पति को संबंध नहीं बनाने दिए और यह कहा कि वह किसी और से शादी करना चाहती थी |  केवल यही नहीं पत्नी एक महीने बाद ससुराल छोड़कर मायके चली गई और वहां जाकर पति और उसके परिवार के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवा दी।

यह शादी साल 2007 में हुई थी और उसके बाद उन दोनों पत्नी- पति ने लगभग 12 साल अलग रहकर गुजारे | पति ने रेवाड़ी की एक अदालत में तलाक के लिए अर्जी दी जिसके चलते दोनों के बीच तलाक हो गया | लेकिन पत्नी हाईकोर्ट पहुंच गई और पति के सारे आरोप नकारे |

लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की बातें सुनकर पति के हक़ में फैसला दिया और कहा कि पत्नी ने सुहागरात के दिन और उसके बाद पति पर अत्याचार किया।

शादी और सेक्स का गहरा नाता है : कोर्ट

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि शादी के बाद भी शारीरिक संबंध ना बनना शादी के वजूद पर सवाल खड़े करता है  | क्योंकि व्यक्ति ने अगर शादी करने के बाद शारीरिक संबंध नहीं बनाए तो फिर शादी किस बात की | यानी साफ है कि शादी करने के बाद दोनों पति-पत्नी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह एक दूसरे को शारीरिक संतुष्टि दे और लगातार संबंध बनाएं ताकि उनका वैवाहिक जीवन चलता रहे

 

 

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