उत्तर प्रदेश के मथुरा जिला के बरसाना क्षेत्र की होली के अलावा देश की  अगर कोई  दूसरी प्रसिद्ध होली है तो वह हरियाणा की कोल्हड़ मार  होली।

कोल्हड़ एक किस्म का मोटा रस्सा है जो कपडे जैसे डुपट्टा आदि  से बनाया जाता है। यह रस्से की तरह कठोर नही होता और हल्के हाथ से बनाया जाता है ताकि कपड़ा रंग सोख ले। होली से पहले कोल्हड़ बना कर उसे रंग में भिगो लिया जाता है।

रंग में भिगोये गए कोल्हड़ का इस्तेमाल सिर्फ महिलाएं करती हैं। शादी शुदा महिलाएं होली के दिन कोल्हड़ मार होली खेलती हैं।

कोल्हड़ का इस्तेमाल कोड़े की तरह किया जाता है। मर्द कोल्हड़ की मार से बचने के लिए एक लठ का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन महिलाओं का निशाना  उनकी टांगें या फिर पीठ होती है।

मर्द अक्सर दोनों हाथ से लठ पकड़ कर कोल्हड़ के वार से बचने की कोशिश करते हैं लेकिन हाथ में कोल्हड़ उठाए भाभियाँ जोर से मर्दों की टांगों और पीठ पर कोल्हड़ मारती हैं। कुछ हल्के हाथ से तो कुछ जोर से कोल्हड़ मार कर मर्दों को दौड़ाती हैं। कई बार होली की आड़ में मर्दों की अच्छी पिटाई भी हो जाती है।

लेकिन मर्दों को भी होली की आड़ में भाभियों से शरारत करने का मौका मिल जाता है। वह मौका पा कर महिलाओं पर रंग भरी बाल्टी उड़ेल कर उनको भिगो डालते हैं।

कोल्हड़ मार होली के बाद महिलाओं को मिठाई खिलाई जाती है। हरियाणा के लोगों का मानना है कि होली के दिन सभी गिले-शिकवे भुला दिए जाने चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here